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तोता

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  तोता   बच्चों पहचानते हो न इस पक्षी को , बहुत प्रिय है न ये पक्षी आपको । इस पर कितने गीत कितनी कविताएं बचपन से ही गुनगुनाई होंगी । तोता! हाँ ये तो उसका प्रचलित नाम है लेकिन इसका अंग्रेजी नाम  रोज रिंग्ड पेराकीट है और वैज्ञानिक नाम  सिटाक्यूला क्रेमरी  है । पूरे विश्व में कई प्रकार के विभिन्न रंगों के तोते मिलते हैं , खास तौर पर अफ्रीका में । भारत में भी 6-7 किस्म के तोते पाए जाते हैं । पर हम आस-पास की बात कर रहे हैं । हमारे आस-पास आमतौर पर दिखने वाले तोतों में रोज रिंग्ड पेराकीट आसानी से मिल जाता है । य हाँ तक कि हर सुबह - शाम ये आस-पास के पे डों पर शोर मचाते , मस्ती करते दिख जाते हैं । इसका आकार आप जानते ही हो , रं...

मुर्गी

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 मुर्गी         मुर्गी का सबंध पक्षी (Bird) जाती है यह ज्यादातर घरों में पाला जाने वाला पक्षी है। मुर्गी (Hen) दुसरे पक्षियों से बड़ी होती है। मुर्गियों का रंग लाल , भूरा तथा सफ़ेद होता है। मुर्गी के दो टांगे होती है। इसके सर पर एक लाल रंग की कलगी होती है। अंग्रेजी में मुर्गी को हेन और मुर्गे को कॉक कहते हैं। लोग मुर्गियों को अंडे तथा मीट के लिए पालते हैं। मुर्गा मुर्गी से बड़ा होता है और इसका रंग भी मुर्गी से अधिक चमकदार होता है। पुराने समयों से ही मुर्गा -मुर्गी का सबंध मनुष्य के साथ रहा है ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में ही इन्हें पाला जाता है। रोज़ाना मुर्गी (Hen) एक जा दो अंडे देती है मुर्गी का अंडा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना गया है क्योंकि अंडे में अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।         मुर्गी (Hen) हल्की से ही आवाज़ से डर जाती हैं। मुर्गी अंडा देने के लिए ख़ास जगह चुनती है और रोज़ाना उसी जगह अंडा देती है। एक मुर्गी हर वर्ष लगभग 300 अंडे देती है। मुर्गी अंडों पर बैठकर अपने शरीर की गर्मी से ब...

कबूतर

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कबूतर     कबूतर एक शांत स्वभाव वाला पक्षी है। कबूतर सभी स्थानों पर भिन्न-भिन्न आकृति वाले होते हैं। कोलंबिडी कुल (गण कोलंबीफॉर्मीज़) की कई सौ प्रजातियों के पक्षियों में से एक छोटे आकार वाले पक्षियों को फ़ाख्ता या कपोत और बड़े को कबूतर कहते हैं। इसका एक अपवाद सफ़ेद घरेलू कबूतर है, जिसे 'शांति कपोत' कहते हैं। कबूतर ठंडे इलाक़ों और दूरदराज़ के द्वीपों को छोड़कर लगभग पूरी दुनिया में पाए जाते हैं। इतिहास कबूतरों को पालतू बनाए जाने का सबसे पुराना उल्लेख मिस्र के पांचवे राजवंश (लगभग 300 ई.पू) से मिलता है। 1150 ई. में बग़दाद के सुल्तान ने कबूतरों की डाक व्यवस्था शुरू की थी और चंगेज़ ख़ां ने अपने विजय अभियानों के विस्तार के साथ ऐसी ही प्रणाली का उपयोग किया था। 1848 की क्रांति के दौरान यूरोप में संदेश वाहक के रुप में कबूतरों का व्यापक इस्तेमाल हुआ था और 1849 में बर्लिन व ब्रूसेल्स के बीच टेलीग्राफ़ सेवा भंग होने पर कबूतरों को ही संदेश वाहक रुप में प्रयुक्त किया गया था। 20 वीं शताब्दी में भी युद्धों के दौरान कबूतरों को आपात संदेश ले जाने के लिए इस्तेमाल ...

मोर

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  मोर     मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। रूप और गुण दोनों में मोर अतुलनीय है। मोर बहुत सुन्दर होता है। इसके पंखों में इन्द्रधनुषी रंग बिखरे हुए हैं। बरसात के मौसम में बादलों को देखकर पक्षी राज मोर झूम उठता है। अपने पंखों को फैलाकर जब यह नाचता है तो मोरनी के साथ साथ सभी इसके नृत्य के दीवाने हो जाते हैं। मोर की ऊंचाई लगभग डेढ़ दो फुट होती है मगर इसका शरीर कुछ बड़ा होता है। वास्तव में अपने लम्बे लम्बे पंखों के कारण यह काफी लम्बा लगता है। नाचते वक्त यह अपने पंख गोल घेरे में ऊपर उठा कर फैला लेता है। मोर के सिर पर एक चमकीली रंग बिरंगी कलगी होती है। इसकी चोंच थोड़ी लम्बी और नुकीली होती है। मोर के पैर उसकी तरह सुन्दर नहीं होते। किस्से कहानियों में कहा जाता है हि मोर अपने पैरों को देखकर रोता है। मोरनी मोर की तरह सुन्दर नहीं होती, क्योंकि उसके पंख मोर जैसे सुन्दर नहीं होते।     मोर हरे भरे जंगलों और खेतों के पास ही रहते हैं। मोर का प्रिय भोजन है कीट पतंग और अनाज के दाने। मोर सांप को भी मार कर खा जाता है।    हमारे देश में मोर को पवित्र माना जाता है। ...

कोयल

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कोयल         कोयल कुकू (Cuckoo) कुल का सुप्रसिद्ध पक्षी कोकिल; मीठी बोली बोलनेवाली भारतीय पक्षियों में इसका विशेष स्थान है। कोयल का नर कौए जैसा गहरा काला और मादा भूरी चितली होती है। कोयल सर्वथा भारतीय पक्षी है; यह इस देश के बाहर नहीं जाती, थोड़ा बहुत स्थानपरिवर्तन करके यहीं रहती है। कोयल शाखाशायी पक्षी है, जो जमीन पर बहुत कम उतरती है। इसके जोड़े सुविधा के अनुसार अपनी सीमा बना लेते हैं और एक दूसरे के अधिकृत स्थान का अतिक्रमण नहीं करते। प्रति वर्ष वे अपने निश्चित स्थान पर ही आते हैं और कुछ समय बिताकर फिर अपने देश लौट जाते हैं।     कुकू कुल के सभी पक्षी दूसरी चिड़ियों के घोसलें में अपना अंडा देने की आदत के लिये प्रसिद्ध हैं। उनकी इस विचित्र आदत को लोग बहुत समय से जानते थे, किंतु इसका यथेष्ट रहस्योद्घाटन पिछले 50 वर्षों में ही हो सका है।       अन्य पक्षियों की भाँति अंडा देने का समय निकट आने पर कुकू वर्ग के पक्षी घोंसला बनाने की चिंता नहीं करते। वे कौए, पोदना और चरखी आदि के घोंसले में अपना एक अंडा देकर, उसका एक अंडा अपनी चोंच में भ...